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बहुत राउडी है यह राठौर – राउडी राठौर [फिल्म समीक्षा]

Posted On: 1 Jun, 2012 मस्ती मालगाड़ी में

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rowdyमसाला फिल्म के इस दौर में आर्ट फिल्मों के दर्शक ढूंढ़ना थोड़ा मुश्किल है, संजय लीला भंसाली भी शायद इस बात को अच्छी तरह समझ गए हैं. सांवरिया और गुजारिश जैसी फ्लॉप फिल्में देने के बाद अब उन्होंने भी मसाला फिल्मों में हाथ आजमाया है. संजय लीला भंसाली के लिए मसाला फिल्म बनाना आसान नहीं था इसीलिए उन्होंने फिल्म निर्देशक के रूप में प्रभुदेवा को चुना.


निर्माता: संजय लीला भंसाली, शबीना खान, रॉनी स्क्रूवाला


निर्देशक: प्रभुदेवा


संगीत: साजिद-वाजिद


कलाकार: अक्षय कुमार, सोनाक्षी सिन्हा, परेश गंत्रा, नसर, सुप्रीथ रे


रेटिंग: ***


फिल्म की कहानी

राउडी राठौर के रूप में एक मनोरंजक कहानी को पर्दे पर उतारा गया है. राउडी राठौर कहानी है शिव (अक्षय कुमार) की जो एक चोर है. इस चोर का महिलाओं पर खूब जादू चलता है और वे उसकी दीवानी हो जाती हैं. प्रिया (सोनाक्षी सिन्हा) से शिव की मुलाकात एक ऐसी शादी में होती है जहां उसे बुलाया ही नहीं गया है. प्रिया का वह दीवाना हो जाता है. शिव की लाइफ में तब समस्या उत्पन्न हो जाती है जब छह वर्ष की नेहा बेवजह उसे पिता मानने लगती है. शिव इसका पता लगाने की कोशिश करता है कि नेहा उसे अपना पिता क्यों मानती है. नेहा के प्यार और उसके प्रति जिम्मेदारी शिव को इंसान के रूप में बदल देती है. शिव न केवल नेहा के अतीत से परिचित होता है बल्कि वह बिहार स्थित छोटे शहर के लोगों के लिए वहां के एमएलए और गुंडों के खिलाफ मसीहा बनकर उभरता है.


फिल्म समीक्षा

आजकल हिंदी फिल्मों के दीवानों को साउथ की रीमेक फिल्में बहुत पसंद आ रही है. इसी कड़ी में अगला नाम है राउडी राठौर. भले ही यह फिल्म पूरी तरह मुंबई और बिहार के गांवों की पृष्ठभूमि पर आधारित है लेकिन फिल्म देखने पर साफ लगता है कि हम दक्षिण भारत का कोई गांव देख रहे हैं. कलाकारों की एक्टिंग, उनके कपड़े, फिल्म के गाने, बैकग्राउंड म्यूजिक आदि सब कुछ बहुत लाउड है. परपल और पिंक कलर की पेंट में अक्षय कुमार को आपने शायद ही पहले कभी देखा हो, लेकिन फिल्म की कहानी के मद्देनजर यह सब उन पर खूब फब रहा है.  कुछ जगह जरूर फिल्म खींची हुई लगती है, लेकिन ऐसे पल कम आते हैं. साउथ की फिल्मों की ही तरह निर्देशक प्रभुदेवा ने फिल्म की गति इतनी तेज रखी है और हर फ्रेम में एंटरटेनमेंट को इतना ज्यादा महत्व दिया है कि दर्शकों को सोचने के लिए ज्यादा समय ही नहीं मिल पाता.


प्रभुदेवा ने एक आम आदमी को ध्यान में रखकर फिल्म का निर्देशन किया है. कॉमेडी, एक्शन और इमोशन का संतुलन भी बखूबी बनाया गया है. बहुत हद तक उम्मीद है कि फिल्म देखने के दौरान आप बोर ना हों.


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