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एक मैं और एक तू : फिल्म समीक्षा

Posted On: 10 Feb, 2012 मस्ती मालगाड़ी में

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हिन्दी फिल्मों में हास्य और रोमांस का रस ऐसा है जो हमेशा काम करता है. लेकिन बिना सिर-पैर की कहानियां अक्सर बॉक्स ऑफिस पर मुंह के बल गिर जाती हैं फिर चाहे उनकी कास्टिंग कितनी ही अच्छी क्यूं ना हो. इस हफ्ते रिलीज हुई एक मैं और एक तू का हाल भी कुछ ऐसा ही है. करीना कपूर और इमरान खान जैसे स्टार्स के बाद भी फिल्म बॉक्सऑफिस पर पहले दिन कुछ खास भीड़ इकठ्ठा नहीं कर पाई. हॉलिवुड फिल्म “व्हाट हैपेन्स इन वेगास” की कहानी से मेल खाती एक मैं और एक तू कॉमेडी फिल्म तो है लेकिन फिल्म में कुछ ज्यादा ही फैंटसी का इस्तेमाल कर इसे खराब कर दिया गया है. आइए जानें फिल्म की कहानी और समीक्षा.


EK MAI AUR EK TUफिल्म का नाम: एक मैं और एक तू

कलाकार: इमरान खान, करीना कपूर, सोनिया मेहरा, राम कपूर, बोमन ईरानी, रत्ना पाठक

निर्देशक: शकुन बत्रा

निर्माता: करण जौहर

संगीत निर्देशक: अमित त्रिवेदी

रेटिंग: **


कहानी

फिल्म में राहुल कपूर (इमरान खान) अपने माता-पिता (बोमन ईरानी, रत्ना पाठक)  के साथ वेगास शहर में रहता है. वह अपने माता-पिता का आज्ञाकारी बेटा है. लेकिन इसके साथ ही वह अपने माता-पिता के दबाव में आकर उनकी ही तरह बन जाता है. इसी बीच एक दिन उसकी नौकरी चली जाती है और वह अपने माता-पिता को बताए बिना दूसरी नौकरी की तलाश में जुट जाता है.


इसी खोज में उसकी मुलाकात होती है रियाना ब्रेग्रैंजा (करीना कपूर) से जो एक बिंदास स्वभव की लड़की है. उसमें वह सभी गुण हैं जो राहुल में नहीं हैं. रियाना एक हेयरस्टाइलिस्ट है. क्रिसमस की शाम को दोनों साथ में मिलकर खूब शराब पीते हैं और सुबह पाते हैं कि दोनों शादी कर चुके हैं. बस यहीं से शुरू हो जाता है ड्रामा. अब उन्हें सिर्फ दस दिन के अंदर ही अलग होना है. लेकिन चन्द दिनों के अंदर ही दोनों इतने करीब आ जाते हैं कि एक दूसरे से दूर नहीं जा पाते. आगे क्या होता है उसे आप पारंपरिक हिंदी फिल्म और खासकर करण जौहर की रोमांटिक फिल्मों को देखकर पता लगा सकते हैं.


ekmain-b-13-1-2012फिल्म समीक्षा

फिल्म औसत है. कॉमेडी के साथ रोमांस का कॉकटेल युवाओं को जरूर पसंद आएगा. इसके साथ ही फिल्म में इमरान खान और करीना कपूर की फ्रेश जोड़ी को दर्शक जरूर पसंद करेंगे. लेकिन फिल्म की कहानी और मजबूत बनाई गई होती तो लोग जरूर इस फिल्म को तीन घंटे बैठकर देख पाते पर यही कहानी का कमजोर पक्ष है.


इमरान खान का अभिनय भी फिल्म में औसत ही रहा है और करीना कपूर भी एक बार फिर अपनी “जब वी मेट” वाली छवि को दोहराती हुई पाई गई हैं.


फिल्म का सबसे सशक्त पक्ष इसका संगीत है जो युवाओं और बड़ों सभी को पसंद आ रहा है. देखते हैं वैलेंटाइन डे के मौके पर आई यह फिल्म युवाओं को कितना खींच पाती है.




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2 प्रतिक्रिया

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Sable के द्वारा
July 12, 2016

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sneha के द्वारा
February 11, 2012

इमरान दर्शकों को कब तक अपनी कॉमेडी से हसाते रहेंगे. अब उन्हें कुछ गंभीर सामाजिक फिल्मों में काम करना चाहिए. इसके के लिए उन्हें आमिर सलाह लेनी चाहिए.


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