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पोस्टेड ओन: 11 Nov, 2011 मस्ती मालगाड़ी में
चॉकलेटी हीरो की छवि बना चुके रणबीर कपूर शायद अब अपनी इस हलकी-फुलकी छवि से ऊब चुके हैं. आज सुनहरे पर्दे पर प्रदर्शित हो रही फिल्म रॉकस्टार में रणबीर कपूर अपनी पुरानी लेकिन लोकप्रिय छवि से छुटकारा पाने की पूरी कोशिश करेंगे. इम्तियाज अली, जो सोचा ना था और लव आजकल जैसी बेहतरीन फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं. वे अब इस फिल्म में रणबीर कपूर को ऐसे युवक के रूप में प्रदर्शित करने जा रहे हैं जिसके सपने बहुत बड़े हैं. रॉकस्टार फिल्म एक बेहद महत्वाकांक्षी और प्रतिभावान युवक की कहानी है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए किसी भी मुश्किल से नहीं डरता और मंजिल को पाने के लिए कुछ भी कर गुजरने से परहेज नहीं करता. इस फिल्म में रणबीर कपूर का साथ निभा रही हैं एक विदेशी मॉडल और बॉलिवुड की नई-नवेली अभिनेत्री नरगिस फाखरी.
फिल्म: रॉकस्टार
स्टोरी व निर्देशन: इम्तियाज अली
निर्माता: ढिल्लन मेहता, सुनील लुल्ला
संगीत: ए.आर. रहमान
गीत: इरशाद कमाल
रेटिंग: ***
दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला जनार्दन जाखड़ एक बड़ा संगीतकार बनना चाहता है. जनार्दन कॉलेज और दोस्तों में जेजे और जॉर्डन के नाम से मशहूर है. उसे जब भी मौका मिलता है वह अपने संगीत के बल पर लोगों का दिल जीतने का प्रयास करता है. जनार्दन का म्यूजिक के प्रति जुनून देख कैंटीन इंचार्ज खटाना उसे किसी लड़की से सच्चा प्यार करने और प्यार में दिल टूटने के बाद सिंगर बनने की सलाह देता है. इसके बाद जनार्दन कॉलेज की सबसे खूबसूरत लड़की हीर कौल (नरगिस फाखरी ) से अपने प्यार को प्रपोज करता है. शुरुआती नोकझोंक के बाद हीर उसे चाहने लगती है. लेकिन फिर वह उसे छोड़ देता है. हीर का विवाह चेकोस्लोवाकिया में हो जाता है. उस वक्त जेजे को एहसास होता है कि हीर उसके सपनों की रानी है और वह भी एक म्यूजिक कंपनी से करार कर वहीं चला जाता है.
कलाकारों का अभिनय
जनार्दन से लेकर परिवर्तित जॉर्डन के किरदार में रणबीर कपूर प्रभावी लगे हैं. निश्चित रूप से अदाकारी के क्षेत्र में यह उनकी सबसे बेहतरीन फिल्म कही जा सकती है. सीधे- सादे जनार्दन से लाखों के चहेते बने रॉकस्टार जॉर्डन के रोल में रणबीर ने जबर्दस्त मेहनत की है, वहीं नरगिस फाखरी इंटरवल के बाद ओवर एक्टिंग की शिकार रहीं तो कई दृश्यों में बस शो पीस बनकर रह गईं. खटाना के रोल में कुमुद मिश्रा और म्यूजिक कंपनी के मालिक ढींगरा बने पीयूष मिश्रा ने बेहतरीन अभिनय किया है.
संगीत और तकनीकी पक्ष
इम्तियाज अली ने फिल्म में प्रेम का एक अलग अंदाज पेश करने की अच्छी कोशिश की है. लेकिन कहीं-कहीं फिल्म बहुत गंभीर बन पड़ी है जो उन दर्शकों को शायद अच्छी नहीं लग सकती जो सिर्फ मौजमस्ती के लिए फिल्म देखते हैं.
ए. आर. रहमान का संगीत स्क्रिप्ट और फिल्म के हिसाब से बहुत अच्छा है. रॉक म्यूजिक के दीवाने यंगस्टर्स को रहमान की म्यूजिक और मोहित चौहान के स्वर झूमने पर मजबूर करने में सफल हुए हैं. साढा हक एथे रख और जो भी मं कहना चाहु समेत फिल्म के लगभग सभी गीत पहले ही हिट हो चुके हैं.
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