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एक बच्चे के हौसले की कहानी : आई एम कलाम

Posted On: 5 Aug, 2011 मस्ती मालगाड़ी में

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आजकल बॉलिवुड में प्रयोगवादी फिल्मों की धूम मची हुई है. लीक से हटकर बनने वाली इन फिल्मों में एक नया नाम है फिल्म “आई एम कलाम”. देश से सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रपति और मिसाइलमैन ए पी जे अब्दुल कलाम से मिलने के लिए एक बच्चा किस किस तरह के जतन करता है यह फिल्म “आई एम कलाम” की कहानी में है. हर्ष मायर ने इस फिल्म में अपने अभिनय से पहले ही कई बड़े अवार्ड शो और विदेशों में धूम मचा दी है और अब यह फिल्म भारतीय दर्शकों को अपनी तरफ खींचने के लिए पर्दे पर आ रही है.


अमूमन भारत में देखा जाता है कि बच्चों पर बनी फिल्मों को लोग सिनेमाघरों में जाकर देखना पसंद नहीं करते. हाल ही में “चिल्लर पार्टी” के साथ भी ऐसा ही हुआ लेकिन यह फिल्म सिर्फ बच्चों के लिए नहीं बल्कि उन सभी के लिए है जो समाज में अनाथ और गरीब बच्चों के लिए सहानुभूति रखते हैं. स्माइल फाउंडेशन जोकि बच्चों के कल्याण के लिए एक गैर-सरकारी संगठन है उसने फिल्म के जरिए बाल भावनाओं को इस तरह पेश किया है कि यह आपके दिल को छू लेगी.


फिल्म का नाम: आई एम कलाम

फिल्म के कलाकार: हर्ष मायर, गुलशन ग्रोवर, हुसैन साद, बिट्रिस ओर्डिक्स

निर्माता: शांतनु मिश्रा

निर्देशक: नीला माधव पांडा

स्टार: ***


I Am Kalamआई एम कलाम की कहानी

आई एम कलाम एक गरीब राजस्थानी लड़के छोटू (हर्ष मायर) की कहानी है जो ए पी जे अब्दुल कलाम का बहुत बड़ा प्रशंसक है और उनसे मिलना चाहता है. फिल्म का कथ्य गरीबी रेखा के नीचे जीवन बसर कर रहे नन्हें छोटू के इर्द-गिर्द घूमता है, जो विपरीत परिस्थितियों में जोश और जज्बे को बनाए रखता है. छोटू की प्रेरणा पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम हैं.


कलाम के एक भाषण को सुनने के बाद जीवन के प्रति छोटू का नजरिया बदल जाता है. दिन भर बाल मजदूरी के बाद शाम को किताबों के साथ वक्त गुजार कर छोटू अपनी पढ़ाई पूरी करने की हर संभव कोशिश करता है. छोटू को यकीन है कि एक दिन वह ए पी जे अब्दुल कलाम जैसी बड़ी शख्सियत बनेगा.


I AM KALAMआई एम कलाम की समीक्षा

अगर हाल के सालों में “तारे जमीं पर” ने बच्चों की भावनाओं को बहुत कर करीब से छुआ है तो “आई एम कलाम” ने बालमन के हर उस पहलू को भी गहराई से दिखाया है जिसमें “तारे जमीं पर” विफल हो गई थी. “आई एम कलाम” में निर्देशक नीला माधव पांडा ने बहुत ही बारीकी से अपना काम किया है. बाल कलाकार को लीड रोल में रखकर बनाई गई इस फिल्म के सभी पहलू सकारात्मक और बेहतरीन हैं.


फिल्म में बॉलिवुड के बैडमेन गुलशन ग्रोवर ने एक गुडमैन की भूमिका निभाई है. काफी लंबे समय बाद उन्हें पर्दे पर इतना अच्छा अभिनय करता देखना वाकई सुखद है. फिल्म के मुख्य कलाकार हर्ष मायर ने तो अपने अभिनय से सबको घायल ही कर दिया. हर्ष मायर का अभिनय देखकर यह कह पाना मुश्किल है कि यह उनकी पहली फिल्म है जिसमें वह लीड रोल में हैं. हर्ष को इस साल ही सर्वोत्तम बाल कलाकार का नेशनल पुरस्कार मिल चुका है. दूसरे बालक के रूप में हसन साद  का योगदान बराबरी का है.


फिल्म के संगीत में आपको राजस्थानी रंग मिलेगा क्यूंकि फिल्म की पटकथा ही राजस्थानी बच्चे पर आधारित है. फिल्म में गांव-देहात की झलक को कैमरे पर बहुत बारीकी से दर्शाया गया है. फिल्म में खुद पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने भी एक छोटा सा किरदार निभाया है.


अगर आप सीरियस फिल्मों के शौकीन हैं या फिर पर्दे पर प्यार मोहब्बत की फिल्में देखकर पक गए हैं तो आई एम कलाम आपके लिए एक बेहतरीन फिल्म है.




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