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भाई-बहन की बांडिंग बम बम बोले

Posted On: 15 May, 2010 मस्ती मालगाड़ी में

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bum bum bole1मुख्य कलाकार : दर्शील  सफारी, जिया वस्तानी,  रितुपर्णो  सेनगुप्ता,  अतुल कुलकर्णी आदि।

निर्देशक : प्रियदर्शन

तकनीकी टीम : निर्माता – परसेप्ट पिक्चर कंपनी, कथा-पटकथा-संवाद- मनीषा कोरडे, गीत- इरफान सिद्दिक, सतीश मुटाटकर, समीर, संगीत- अजान सामी, तापस रेलिया, एम जी श्रीकुमार

**1/2 ढाई स्टार

-अजय ब्रह्मात्मज


प्रियदर्शन के निर्देशकीय व्यक्तित्व के कई रूप हैं। वे अपनी कामेडी फिल्मों की वजह से मशहूर हैं, लेकिन उन्होंने कांजीवरम जैसी फिल्म भी निर्देशित की है। कांजीवरम को वे दिल के करीब मानते हैं। बम बम बोले उनकी ऐसी ही कोशिश है। यह ईरानी फिल्मकार माजिद मजीदी की 1997 में आई चिल्ड्रेन आफ हेवन की हिंदी रिमेक है। प्रियदर्शन ने इस फिल्म का भारतीयकरण किया है। यहां के परिवेश और परिस्थति में ढलने से फिल्म का मूल प्रभाव बदल गया है।


पिनाकी और गुडि़या भाई-बहन हैं। उनके माता-पिता की हालत बहुत अच्छी नहीं है। चाय बागान और दूसरी जगहों पर दिहाड़ी कर वे परिवार चलाते हैं। गुडि़या का सैंडल टूट गया है। पिनाकी उसे मरम्मत कराने ले जाता है। सैंडिल की जोड़ी उस से खो जाती है। दोनों भाई-बहन फैसला करते हैं कि वे माता-पिता को कुछ नहीं बताएंगे और एक ही जोड़ी से काम चलाएंगे। गुडि़या सुबह के स्कूल में है। वह स्कूल से छूटने पर दौड़ती-भागती निकलती है, क्योंकि उसे भाई को जूते देने होते हैं। भाई का स्कूल दोपहर में आरंभ होता है। कई बार गुडि़या को देर हो जाती है तो पिनाकी को स्कूल पहुंचने में देर होती है। जूते खरीद पाने का और कोई उपाय न देख पिनाकी इंटर स्कूल दौड़ में शामिल होने का फैसला करता है। वह तीसरा आना चाहता है ताकि उसे ईनाम में जूते मिलें। संयोग ऐसा कि वह प्रथम आ जाता है। फिल्म भाई-बहन के मनोभावों को सहेजती गरीबी में पल रहे बच्चों को सहज तरीके से पेश करती है। भाई-बहन के साथ उनके माता-पिता के संघर्ष की भी कहानी चलती है, जिसमें आतंकवाद से प्रभावित इलाके में ईमानदार और सभ्य नागरिक के दीन-हीन संघर्ष का चित्रण है।


बम बम बोले का मूल देख चुके दर्शकों को इस फिल्म से खुशी नहीं होगी, क्योंकि मूल की तरह का सहज प्रवाह और मासूमियत इस फिल्म में नहीं है। प्रियदर्शन ने बंगाल के चाय बागान का परिवेश लिया है, लेकिन मजदूरों के बच्चे होने पर भी भाई-बहन खालिस हिंदी बोलते हैं। यह मुमकिन हो सकता है, लेकिन वे जिस कांवेंट स्कूल में पढ़ते हैं,वहां सूचनाएं हिंदी में लिखी जाती है और वह भी गलत हिंदी में.. तीसरा ईनाम को तिसरा ईनाम.. प्रियदर्शन की कामेडी फिल्मों में भी ऐसी चूक होती है। क्या पूरी यूनिट में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं रहता जो पूरे पर्दे पर दिखाई जा रही सूचना की हिंदी व‌र्त्तनी सुधार दे।

बम बम बोले मूल की तुलना में कमजोर फिल्म है, लेकिन हिंदी फिल्मों के परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह कथित रूप से बड़ी और पापुलर फिल्मों से उत्तम है। बम बम बोले संवेदनशील फिल्म है। भाई-बहन की बांडिंग और गरीबी में भी उनकी जिंदादिली प्रेरित करती है। दर्शील सफारी और जिया वस्तानी ने सुंदर काम किया है। अतुल कुलकर्णी अपनी पीढ़ी के संजीदा अभिनेता हैं। उन्होंने लाचार लेकिन ईमानदार पिता के चरित्र को अच्छी तरह निभाया है।



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349 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Wood के द्वारा
July 12, 2016

It’s good to get a fresh way of loonkig at it.

razia mirza के द्वारा
May 23, 2010

ईरानी फिल्मकार माजिद मजीदी की 1997 में आई चिल्ड्रेन आफ हेवन की यह फ़िल्म देखने के बाद बहोत रोना आया था । उस फ़िल्म के बच्चोंने अपंने रोल में मानो जान डाल दी थी। नकल मुझे पसंद नहिं। असल की बराबरी हो ही नहिं सकती।

sunny rajan के द्वारा
May 17, 2010

पिछले सप्ताह के अंत तक बम बम बोले ने मात्र 7 फीसदी का काम किया था इसका कारण फिल्म में कोई भी बड़ा कलाकार ना होना था, हलाकि दर्शील सफारी और अतुल कुलकर्णी अच्छे कलाकार है पर वह सेलेबल स्टार नहीं है.

    Trix के द्वारा
    July 12, 2016

    Ja, sÃ¥ kan jeg jo pludselig godt se at min dreng er en ordentlig krabat Han er 11 dage gammel, og hans fÃe¦d¸lsvÃsgt var 4350 gram.Men børn er bare forskellige. Og jeres pige trives jo! SÃ¥ mon ikke lidt erstatning kan give hende lidt ekstra.Held og lykke med jeres smukke datter!


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